चोरी दी रोटी मुंह दे अंदर कंकर बन जावे, (2)
जिन्ना मर्जी चित्थ के खाओ अंदर ना जावे (4)
चोरी दी रोटी....
1. दिल लग्गिया कर कर के अपना आप ग्वौना, (2)
कम ना होवन वचन मुताबिक फिर पैंदा पछतौना (4)
चंगा भला विश्वासी वी जद जानवर बन जावे। (2)
चोरी दी रोटी....
2. जेहड़ा दिल करदा ए हर इक थां तो चोरी (2)
धुप्प तो चोरी छाँ तो चोरी पियो तो चोरी मां तो चोरी (4)
उस दे अंदर बदरुहा दा लश्कर बन जावे (2)
चोरी दी रोटी....
3. नकली रह जांदा ए असल कदे ना होवे (2)
सारी जिंदगी फिर ओह बंदा सफल कदे ना होवे (4)
ओह ता उस धरती वर्गा जो बंजर बन जावे (2)
चोरी दी रोटी....
4. दिल दे बाग बगीचे रहन हमेशा खिल दे (2)
ए अमानत आओ करिए रोज दुआवा मिल के (4)
साडा एह दिल पाक मसीह दी हैकल बन जावे (2)
चोरी दी रोटी.....

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